नई दिल्ली, 14 अक्टूबर 2026। भारत और कनाडा के बीच के रिश्तों ने पिछले एक साल में पूरी तरह नई दिशा ले ली है। 13 अक्टूबर की रात प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और कनाडाई प्रधानमंत्री मार्क कार्नी के बीच फोन वार्ता हुई, और अगले ही दिन दोनों देशों के विदेश एवं वाणिज्य मंत्रियों की नई दिल्ली में लगातार बैठकें चल रही हैं। इसी कड़ी में बुधवार को पीएम मोदी की अध्यक्षता में आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति (सीसीईए) ने आईडीबीआई बैंक की 60.72 प्रतिशत हिस्सेदारी कनाडाई कंपनी फेयरफैक्स को 52,878 करोड़ रुपये (लगभग 5.6 अरब डॉलर) में बेचने को मंजूरी दे दी।
दैनिक जागरण की रिपोर्ट के अनुसार, यह भारत के वित्तीय क्षेत्र में अब तक का सबसे बड़ा विदेशी निवेश (एफडीआई) सौदा होगा। जिन दिनों दोनों देश एक-दूसरे के उच्चायुक्तों को निष्कासित कर रहे थे, आज उन्हीं दोनों के बीच व्यापार, ऊर्जा, रक्षा और जन-जन संबंधों की वार्ताएं दिन-रात चल रही हैं। राजनय की यह उदाहरण-प्रतिमा हमें याद दिलाती है कि संवाद का मार्ग ही स्थायी मैत्री का मार्ग है, जैसा सम्राट अशोक के शिलालेख हमें सदियों से सिखाते आए हैं।
मोदी-कार्नी वार्ता में क्या सहमति बनी
कनाडाई प्रधानमंत्री कार्यालय के अनुसार, दोनों नेताओं ने व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौते (सीईपीए) की वार्ता को जल्द से जल्द पूरा करने की प्रतिबद्धता दोहराई और 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को दोगुना करने का लक्ष्य रखा। फोन वार्ता के दौरान दिसंबर में पीएम मोदी की संभावित कनाडा यात्रा पर भी निकट संपर्क बनाए रखने की सहमति बनी। यह यात्रा अमेरिका में होने वाले जी20 शिखर सम्मेलन से पहले संभव हो सकती है।
नवभारत टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, दोनों नेताओं ने व्यापार, ऊर्जा, तकनीक और सुरक्षा समेत कई क्षेत्रों में रणनीतिक साझेदारी को आगे बढ़ाने पर सहमति जताई। हाल ही में राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल और कार्नी के सलाहकार डेविड मॉरिसन के बीच भी वार्ता हुई थी, जिसमें सुरक्षा संबंधों को नई मजबूती देने पर सहमति बनी। आजतक की रिपोर्टिंग ने भी इस बातचीत को ट्रूडो युग की कड़वाहट से मुक्ति के रूप में देखा है।
जयशंकर-अनिता आनंद की नई दिल्ली बैठक
कनाडा की विदेश मंत्री अनिता आनंद मंगलवार रात नई दिल्ली पहुंचीं और बुधवार दोपहर विदेश मंत्री एस. जयशंकर से उनकी मुलाकात हुई। यह सितंबर 2025 के बाद दोनों विदेश मंत्रियों के बीच 11वीं बैठक है, जो उच्चस्तरीय संवाद की निरंतरता का प्रमाण है।
जयशंकर ने बताया,
