नीतीश कुमार का वो 15 मिनट का फैसला: बख्तियारपुर की सीख से बदली बिहार की परीक्षा प्रणाली
पटना। बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री और वर्तमान राज्यसभा सांसद नीतीश कुमार इन दिनों अपने पैतृक गांव बख्तियारपुर में हैं। राजनीति की व्यस्तताओं से मुक्त होकर वे अपने बचपन की यादों को संजो रहे हैं। यही वह स्थान है, जहां से उनके जीवन की नींव पड़ी थी। श्री गणेश हाई स्कूल में बिताए गए दिनों ने उन्हें जीवन की कठिनाइयों से लड़ना सिखाया और उनके व्यक्तित्व को गढ़ा। इसी स्कूल में एक शिक्षक की प्रेरणा से उनमें गणित के प्रति गहरी रुचि पैदा हुई, जो आगे चलकर उनकी पहचान बनी।
मैट्रिक परीक्षा का वह किस्सा, जिसने बदल दी नीतीश कुमार की सोच
नीतीश कुमार के जीवन में मैट्रिक की परीक्षा का एक किस्सा बेहद खास है। परीक्षा के दौरान गणित के प्रश्न पत्र को हल करते समय वे लगभग सभी प्रश्नों के उत्तर लिख चुके थे। अंतिम प्रश्न में अधिक गणना के कारण उन्हें अतिरिक्त समय की आवश्यकता थी। वे उत्तर के अंतिम चरण में ही थे कि परीक्षा समाप्त होने की घंटी बज गई। उन्होंने निरीक्षक से कुछ पंक्तियां और लिखने का अनुरोध किया, लेकिन नियमों का हवाला देते हुए निरीक्षक ने उनकी उत्तर पुस्तिका ले ली। यह घटना उनके मन में गहरे बैठ गई।
इस घटना के बावजूद नीतीश कुमार ने मैट्रिक परीक्षा में उत्कृष्ट अंक प्राप्त किए और पटना के प्रतिष्ठित साइंस कॉलेज में प्रवेश लिया। इसके बाद 1967 में उन्होंने बिहार कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग (अब एनआईटी पटना) में दाखिला लिया। इंजीनियरिंग के तीसरे वर्ष में ही वे छात्र राजनीति से जुड़ गए और धीरे-धीरे विधायक, केंद्रीय मंत्री और नवंबर 2005 में बिहार के मुख्यमंत्री बने।
मुख्यमंत्री बनने के बाद भी नहीं भूले वह अनुभव
मुख्यमंत्री बनने के बाद भी नीतीश कुमार उस दिन को नहीं भूले। उन्हें हमेशा लगता था कि यदि उस दिन उन्हें थोड़ा और समय मिला होता, तो वे और बेहतर अंक प्राप्त कर सकते थे। यही सोच उन्हें परेशान करती रही और उन्होंने इस अनुभव को बिहार के छात्रों के लिए एक सकारात्मक बदलाव में बदलने का निर्णय लिया।
17 फरवरी 2006: मैट्रिक परीक्षा में 15 मिनट के अतिरिक्त समय की ऐतिहासिक घोषणा
मुख्यमंत्री बनने के महज तीन महीने बाद, 17 फरवरी 2006 को नीतीश कुमार की सरकार ने एक ऐतिहासिक फैसला लिया। तत्कालीन शिक्षा मंत्री वृषिण पटेल ने घोषणा की कि इस वर्ष से मैट्रिक परीक्षा में छात्रों को प्रश्न पत्र को पढ़ने और समझने के लिए 15 मिनट का अतिरिक्त समय दिया जाएगा। इस दौरान छात्र केवल प्रश्नों को समझेंगे, जिससे वे निर्धारित समय में अपने उत्तर बेहतर ढंग से लिख सकेंगे। इस सुविधा के दुरुपयोग को रोकने के लिए सख्त नियम भी बनाए गए। यह निर्णय बिहार की शिक्षा प्रणाली में एक महत्वपूर्ण बदलाव साबित हुआ।
बख्तियारपुर से जुड़ा भावनात्मक लगाव और स्कूल का कायाकल्प
नीतीश कुमार का बख्तियारपुर से गहरा भावनात्मक जुड़ाव रहा है। 2020 में मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के बाद वे अपने पुराने स्कूल श्री गणेश हाई स्कूल (अब श्री गणेश उच्चतर माध्यमिक स्कूल) गए थे। वहां पहुंचकर वे भावुक हो गए और अधिकारियों को स्कूल के कायाकल्प का आदेश दिया। मार्च 2026 में जब वे निर्माण कार्यों का जायजा लेने पहुंचे, तो उन्होंने उस स्थान को देखने की इच्छा जताई, जहां उनके जमाने में कक्षाएं लगती थीं। शिक्षकों ने बताया कि वहां अब नया निर्माण हो चुका है। यह दृश्य उनके लिए अत्यंत भावुक करने वाला था।
नीतीश कुमार का फैसला: एक प्रेरणादायक विरासत
नीतीश कुमार का यह निर्णय केवल एक प्रशासनिक फैसला नहीं, बल्कि एक ऐसी विरासत है, जो बिहार के लाखों छात्रों के भविष्य को प्रभावित करती है। उन्होंने अपने व्यक्तिगत अनुभव को सामाजिक हित में बदलकर यह सिद्ध किया कि एक नेता की संवेदनशीलता और दूरदृष्टि से समाज में सकारात्मक परिवर्तन संभव है। यह कहानी हमें सिखाती है कि अतीत के अनुभव, चाहे वे कितने भी कठिन क्यों न हों, हमें आगे बढ़ने की प्रेरणा दे सकते हैं।