जयपुर हत्याकांड: पत्नी और तीन बेटियों की हत्या के आरोपी राहुल झा को सीकर से गिरफ्तार
जयपुर में अपनी पत्नी और तीन बेटियों की कथित रूप से हत्या करने वाले आरोपी राहुल झा (45) को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। आरोपी जयपुर से भागकर सीकर जिले के रिंगस क्षेत्र में छिपा हुआ था, जहां से उसे हिरासत में लिया गया।
कैसे पकड़ा गया आरोपी राहुल झा?
करधनी थाना पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज की मदद से आरोपी का सुराग लगाया। पुलिस ने उसकी जानकारी देने वाले के लिए 25,000 रुपये के इनाम की घोषणा भी की थी। बताया जा रहा है कि हत्या के बाद राहुल खाटूश्याम जी मंदिर गया और वहां पूजा-अर्चना की। इसके बाद वह एक होटल में रुका।
होटल में पैसे खत्म होने पर उसने अपनी अंगूठी बेचने की कोशिश की, लेकिन होटल संचालक ने अंगूठी लेने से मना कर दिया। इसके बाद आरोपी रिंगस पहुंचा। पुलिस को सूचना मिलते ही टीम ने रिंगस से मुंह पर रुमाल बांधे घूम रहे राहुल को दबोच लिया।
कर्ज के बोझ ने दिया खौफनाक कदम उठाने को मजबूर
प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने बताया कि वह भारी कर्ज में डूबा हुआ था, जिसके चलते उसने यह कदम उठाया। पुलिस को संदेह है कि उसने खाने में जहर मिलाकर पत्नी और बेटियों को खिलाया। सुबह जब उसे लगा कि वे बच सकती हैं, तो उसने घर के बाहर रखा करीब 10 किलो वजन और डेढ़ फीट आकार का सीमेंट का स्लैब उठाकर उनके सिर और चेहरे पर कई वार किए।
हत्या के बाद पिता के लिए बनाई चाय, फिर हुआ फरार
पुलिस जांच में सामने आया कि राहुल ने सुबह करीब 7 बजे दूध लिया और अपने 85 वर्षीय पिता लक्ष्मीनाथ झा के लिए चाय बनाई। इसके बाद उसने पिता से कहा कि वह बाहर जा रहा है और घर से भाग गया। पुलिस का कहना है कि जल्द ही इस मामले में और बड़ा खुलासा किया जाएगा।
परिवार के चार सदस्यों की मौत, शव घर के अलग-अलग कमरों में मिले
पुलिस को शुक्रवार सुबह करीब 10 बजे सूचना मिली थी। मौके पर पहुंची पुलिस को गीता झा (40) और उनकी बेटियों नंदिनी (22), राधिका (17) और गिरीश उर्फ गौरी (14) के खून से लथपथ शव मिले। गीता का शव पहली मंजिल के एक कमरे में था, जबकि तीनों बेटियों के शव जमीनी मंजिल के दो कमरों में मिले। पुलिस ने घर से राहुल के खून से सने कपड़े और स्विच ऑफ मोबाइल फोन भी बरामद किया है।
यह घटना समाज के लिए एक गंभीर चेतावनी है। आर्थिक तनाव और कर्ज जैसी समस्याएं किस हद तक इंसान को संवेदनहीन बना सकती हैं, यह इस घटना से स्पष्ट होता है। भारतीय परंपरा में परिवार को सबसे पवित्र संस्था माना गया है। ऐसे में यह घटना मानवीय मूल्यों पर एक गहरा प्रश्नचिह्न लगाती है। समाज को ऐसे हालात में एक-दूसरे का सहारा बनना चाहिए, न कि हिंसा का रास्ता अपनाना चाहिए।