नून गांव में बाईपास की मांग: दो युवकों की मौत के बाद छह घंटे सड़क जाम
जालोर जिले के नून गांव में बाईपास निर्माण की वर्षों पुरानी मांग को लेकर ग्रामीणों का आक्रोश शुक्रवार को सड़क पर उतर आया। दो युवकों की दर्दनाक सड़क दुर्घटना में मौत के बाद ग्रामीणों ने छह घंटे तक सांथू-आकोली मुख्य मार्ग को जाम कर प्रशासन के खिलाफ प्रदर्शन किया। प्रशासन के आश्वासन के बाद जाम तो खोला गया, लेकिन ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो वे बड़ा आंदोलन करने को मजबूर होंगे।
दुर्घटना ने बढ़ाया ग्रामीणों का गुस्सा
गांव के बीच से गुजरने वाला एमडीआर मार्ग हादसों का प्रमुख कारण बन चुका है। सड़क की कम चौड़ाई और भारी वाहनों की लगातार आवाजाही के कारण आए दिन दुर्घटनाएं होती रहती हैं। दो दिन पहले हुए दर्दनाक सड़क हादसे में दो युवकों की मौत के बाद ग्रामीणों का आक्रोश फूट पड़ा और उन्होंने सड़क पर उतरकर आंदोलन शुरू कर दिया।
पांच वर्षों से लंबित है बाईपास की मांग
ग्रामीणों ने बताया कि नून गांव में बाईपास निर्माण की मांग पिछले कई वर्षों से की जा रही है। इस संबंध में कई बार प्रशासन, जनप्रतिनिधियों और संबंधित विभागों को ज्ञापन दिए गए, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। सरपंच प्रतिनिधि हमीर सिंह ने बताया कि करीब पांच वर्षों से बाईपास निर्माण की मांग लगातार उठाई जा रही है। शुरुआत में भूमि उपलब्ध नहीं होने की बात कही गई थी, इसके बाद ग्राम पंचायत ने प्रस्ताव पारित कर आवश्यक भूमि उपलब्ध करवाई और सैटेलाइट सर्वे के आधार पर बाईपास का नक्शा तैयार कर संबंधित विभाग को भेजा गया। राज्य सरकार और अधिकारियों को भी प्रस्ताव भेजे गए, लेकिन निर्माण कार्य शुरू नहीं हो पाया।
सड़क की कम चौड़ाई बनी हादसों की वजह
ग्रामीणों के अनुसार गांव के बीच से गुजर रही एमडीआर सड़क की चौड़ाई मात्र 7 से 8 फीट है, जबकि इस मार्ग से भारी वाहनों का आवागमन लगातार जारी रहता है। ऐसे में पैदल चलने वाले लोगों और वाहन चालकों की सुरक्षा हमेशा खतरे में बनी रहती है। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि प्रशासन को समस्या की जानकारी होने के बावजूद लंबे समय से समाधान नहीं किया गया। सड़क जाम के कारण सांथू-आकोली मुख्य मार्ग पर करीब छह घंटे तक यातायात प्रभावित रहा। सड़क के दोनों ओर वाहनों की लंबी कतारें लग गई और लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ा।
प्रशासन का आश्वासन, लेकिन ग्रामीणों का अविश्वास
सूचना मिलने पर जालोर तहसीलदार अर्जुन सिंह चौहान मौके पर पहुंचे और ग्रामीणों से बातचीत की। तहसीलदार ने ग्रामीणों को आश्वासन दिया कि बाईपास निर्माण से जुड़ी लंबित राजस्व प्रक्रिया और सैटेलाइट मैप संबंधी कार्य जल्द पूरा करवाकर प्रस्ताव का निस्तारण किया जाएगा। आश्वासन मिलने के बाद ग्रामीणों ने आंदोलन समाप्त कर सड़क जाम खोल दिया। हालांकि ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द कार्रवाई शुरू नहीं हुई तो वे भविष्य में बड़ा आंदोलन करने को मजबूर होंगे।
क्या बाईपास बनने से सड़क हादसों में कमी आएगी?
ग्रामीणों का कहना है कि बाईपास बनने से गांव के अंदर भारी वाहनों का दबाव कम होगा और सड़क हादसों में कमी आएगी। यह मांग सिर्फ सुविधा नहीं, बल्कि जीवन की रक्षा का सवाल है। अब देखना यह है कि प्रशासन अपने आश्वासन पर कितना खरा उतरता है और ग्रामीणों की इस जायज मांग का समाधान कब तक होता है।