बंगाल में अंडों की राजनीति: महुआ पर हमला या लोकतंत्र का पतन?
पश्चिम बंगाल के नादिया में तृणमूल कांग्रेस सांसद महुआ मोइत्रा पर प्रदर्शनकारियों द्वारा अंडे फेंके जाने की घटना ने राज्य की राजनीति में शिष्टाचार के स्तर को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। भारतीय जनता पार्टी इसे जनता के स्वाभाविक आक्रोश और तृणमूल की आंतरिक गुटबाजी के रूप में देख रही है, जबकि तृणमूल कांग्रेस इसे एक सोची समझी साजिश बता रही है। इस पूरे प्रकरण में सत्ता और विपक्ष के बीच का संवादहीन संघर्ष भारतीय लोकतांत्रिक मूल्यों और सार्वजनिक शिष्टाचार के लिए एक चिंताजनक तस्वीर पेश करता है।
नादिया की घटना में क्या हुआ?
नादिया जिले के कालीगंज में तृणमूल कांग्रेस की सांसद महुआ मोइत्रा एक टीएमसी विधायक के आवास पर बैठक में हिस्सा लेने पहुंची थीं। इसी बीच बाहर जुटी भीड़ ने 'गो बैक' और 'चोर-चोर' के नारे लगाए और उन पर अंडों और बैंगनों की बरसात कर दी। महुआ मोइत्रा ने सूझबूझ दिखाते हुए तीसरी मंजिल की खिड़की से पूरे घटनाक्रम का फेसबुक लाइव कर दिया, जो तुरंत सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि प्रदर्शनकारी इमारत की दीवारों और खिड़कियों पर अंडे फेंक रहे हैं।
महुआ मोइत्रा ने इस घटना को बंगाल में अराजकता का प्रमाण बताया। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य सरकार और पुलिस मूकदर्शक बनी हुई है, और यह कोई आम जनता नहीं बल्कि बीजेपी के पाले हुए गुंडे हैं। उन्होंने एक्स पर राज्य के डीजीपी को टैग करके सवाल उठाए कि पुलिस दो घंटे से तमाशा देख रही है और भीड़ को तितर-बितर नहीं कर रही है।
बीजेपी नेताओं ने दिया क्या बचाव?
इस हमले पर बंगाल बीजेपी के अध्यक्ष समिक भट्टाचार्य ने एक तीखा और व्यंग्यात्मक बयान दिया। उन्होंने कहा कि अंडे फेंकने की घटनाएं रुकनी चाहिए, लेकिन तृणमूल कांग्रेस खुद ही अपने ऊपर हमले करवा रही है।
समिक भट्टाचार्य ने कहा,