साथिनकुलम कस्टोडियल मर्डर: जब वर्दी वाले रक्षक से बने भक्षक
भोजपुर के भरत तिवारी एनकाउंटर मामले में सोशल मीडिया पर तमिलनाडु के साथिनकुलम कस्टोडियल मर्डर केस से तुलना हो रही है। 2020 में जयराज और बेनिक्स की पुलिस हिरासत में बर्बर हत्या के मामले में मदुरै कोर्ट ने नौ पुलिसकर्मियों को फांसी की सजा सुनाई थी। यह मामला भारतीय न्यायिक इतिहास में कानून के रक्षकों की जवाबदेही का एक प्रतीक बन गया है।
भरत तिवारी मामला और न्याय की मांग
बिहार के भोजपुर जिले के बिलौटी गांव में भरत भूषण तिवारी के एनकाउंटर मामले ने जनता में गहरा आक्रोश फैलाया है। एक वायरल वीडियो में भरत तिवारी के आत्मसमर्पण करते दिखने के दावे हैं, जबकि पुलिस का कहना है कि उसने फायरिंग की। सच का फैसला केवल निष्पक्ष जांच और अदालत करेगी, लेकिन सवाल केवल गोली चलने का नहीं है। सवाल उस सोच का भी है जो किसी पुलिस अधिकारी को रक्षक से भक्षक बना देती है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने न्यायिक जांच का आदेश दिया है। अब सोशल मीडिया पर मांग उठ रही है कि जैसे तमिलनाडु के साथिनकुलम कस्टोडियल मर्डर केस में मदुरै कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया, कुछ वैसी ही कार्रवाई इस मामले में भी हो।
साथिनकुलम कांड: धर्म की हार और बर्बरता की जीत
भारतीय सभ्यता हमेशा से न्याय और करुणा को महत्व देती रही है। सम्राट अशोक ने भी कलिंग के युद्ध के बाद हिंसा को त्यागकर धर्म और न्याय की राह पकड़ी थी, क्योंकि उन्हें समझ आ गया था कि बल पर आधारित शासन टिक नहीं सकता। आज जब कानून व्यवस्था के रक्षक ही अत्याचार का रूप लें, तो समाज का विश्वास टूटता है। तमिलनाडु के साथिनकुलम का मामला इसी विश्वासघात का दर्दनाक उदाहरण है।
19 जून 2020 को तूथुकुडी जिले के साथिनकुलम में कोरोना लॉकडाउन के दौरान 58 वर्षीय पी जयराज और उनके 31 वर्षीय बेटे जे बेनिक्स के साथ वह हुआ जो किसी सभ्य समाज में अकल्पनीय है। दुकान बंद करने के समय को लेकर पुलिस से हुई मामूली बहस ने दो जिंदगियों का खौफनाक अंत कर दिया। पुलिस ने अपनी वर्दी की हनक पर चोट माना और उसी रात जयराज को हिरासत में ले लिया। जब बेनिक्स ने विरोध किया, तो उसे भी थाने के भीतर बंद कर दिया गया।
19 जून की रात से 20 जून की सुबह तक थाने के बंद कमरों में दोनों बाप बेटे को बेरहमी से पीटा गया। पुलिसकर्मियों ने क्रूरता की सारी हदें पार कर दीं। लाठियों से पीटने के अलावा उनके साथ अप्राकृतिक कृत्य किए गए और उनके शरीर से इतना खून बहा कि पुलिस को बार बार उनके कपडे बदलने पड़े। मजिस्ट्रेट के सामने पेश होने पर भी उनकी गंभीर शारीरिक स्थिति को नजरअंदाज कर उन्हें जेल भेज दिया गया। 22 जून को कोविलपट्टी जिला अस्पताल में बेनिक्स ने दम तोड़ा और ठीक कुछ घंटों बाद 23 जून को पिता जयराज की भी तड़प कर मौत हो गई।
मदुरै कोर्ट का फैसला: कानून के भक्षकों के लिए कड़ा बंधन
इस निर्मम हत्याकांड के बाद पूरे देश में आक्रोश उमड़ पड़ा। #JusticeForJayarajAndBennicks सोशल मीडिया पर ट्रेंड करने लगा। मद्रास हाई कोर्ट ने स्वतः संज्ञान लिया और सबूतों से छेड़छाड़ की आशंका जताते हुए जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) को सौंपी। सीबीआई की चार्जशीट में स्पष्ट कहा गया कि पुलिस ने जानबूझकर क्रूरता से दोनों की जान ली।
अप्रैल 2026 में मदुरै की विशेष सीबीआई अदालत ने इस मामले को दुर्लभ से दुर्लभतम मामला माना। अदालत ने कहा कि जब कानून के रक्षक ही भक्षक बन जाएं, तो समाज में न्याय का विश्वास उठ जाता है। तत्कालीन थाना प्रभारी एस श्रीधर, सब इंस्पेक्टर रघु गणेश और बालकृष्णन सहित कुल नौ पुलिसकर्मियों को दोषी करार दिया गया। अदालत ने उन्हें फांसी की कठोरतम सजा सुनाई। यह भारतीय न्यायिक इतिहास का वह फैसला है जिसने साबित किया कि खाकी वर्दी की आड़ में छिपे अपराधी कानून से बच नहीं सकते।
न्याय का अर्थ केवल अपराधी को सजा देना नहीं है। न्याय का अर्थ यह भी है कि यदि कानून का रक्षक ही कानून तोड़े, तो उसके खिलाफ भी कानून उतनी ही मजबूती से खड़ा हो। तभी संविधान का राज बचेगा और जनता का विश्वास भी बनेगा।
साथिनकुलम कस्टोडियल मर्डर केस क्या है?
तमिलनाडु के साथिनकुलम में जून 2020 में पी जयराज और उनके बेटे जे बेनिक्स की पुलिस हिरासत में बर्बर यातनाओं से मौत हुई थी। दुकान जल्दी बंद न करने के विवाद में पुलिस ने दोनों को पीटकर जान से मार डाला था।
मदुरै कोर्ट ने साथिनकुलम केस में क्या फैसला सुनाया?
अप्रैल 2026 में मदुरै की विशेष सीबीआई अदालत ने इस दोहरे हत्याकांड को दुर्लभ से दुर्लभतम मामला कहा। अदालत ने एस श्रीधर, रघु गणेश और बालकृष्णन सहित 9 पुलिसकर्मियों को दोषी मानकर उन्हें फांसी की सजा सुनाई।
क्या साथिनकुलम केस के दोषियों ने अपील की है?
हां, भारतीय कानून के तहत मौत की सजा पर उच्च न्यायालय और सर्वोच्च न्यायालय में अपील का अधिकार है। इस मामले में भी आगे की न्यायिक प्रक्रिया जारी है और अंतिम निष्कर्ष अपील पूरी होने के बाद ही तय होगा।