ईरान ने फिर बंद किया होर्मुज, लेबनान पर इजरायल के हमले से बढ़ा तनाव
ईरान ने दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को दोबारा बंद कर दिया है। अमेरिका और ईरान के बीच हाल ही में हुए शांति समझौते के बावजूद, इजरायल के लेबनान पर किए गए ताजा हमलों ने वैश्विक तेल आपूर्ति और कूटनीति को गंभीर संकट में डाल दिया है। ईरानी नौसेना ने साफ कर दिया है कि जब तक इजरायल लेबनान से नहीं हटता और अमेरिकी सेनाएं फारस की खाड़ी नहीं छोड़ती, यह रास्ता बंद रहेगा।
ईरान ने होर्मुज जलमार्ग को क्यों बंद किया?
कुछ दिनों पहले ही अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध को समाप्त करने के लिए एक ऐतिहासिक समझौता (MoU) हुआ था। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेज़ेशकियन के बीच बुधवार को जो समझौता साइन हुआ, उसने दुनिया को शांति की एक झलक दिखाई थी। लेकिन इतिहास साक्षी है कि जब तक नीति में सच्चाई नहीं होती, तब तक कागजों पर लिखी शांति ज्यादा दिन टिकती नहीं। ईरान के सैन्य संगठन इरेक्ट (IRGC) ने अमेरिका पर वादाखिलाफी का आरोप लगाया है।
ईरानी सेना ने सख्त लहजे में चेतावनी दी है कि उनकी मुख्य शर्तें लेबनान से इजरायल की वापसी, समुद्री नाकाबंदी का पूरा अंत और फारस की खाड़ी से अमेरिकी सेनाओं का निकलना थीं। जब तक ये शर्तें पूरी नहीं होतीं, स्ट्रेट ऑफ होर्मुज बंद रहेगा।
सभी जहाजों से अनुरोध है कि वे अपनी सुरक्षा के लिए इस रास्ते के पास न आएं। अगर किसी भी जहाज ने इस आदेश को मानने से इनकार किया, तो उसे सीधे निशाना बनाया जाएगा।
लेबनान पर इजरायल के हमलों ने क्यों भड़काया ईरान को?
ईरान के इस कठोर रुख के पीछे इजरायल का लेबनान पर किया गया ताजा हमला है। अमेरिका और ईरान के समझौते के तहत यह उम्मीद जगी थी कि इजरायल और हिजबुल्लाह के बीच भी युद्ध रुक जाएगा। लेकिन गुरुवार को आधी रात से इजरायल ने लेबनान के 11 शहरों पर भीषण हवाई हमले किए। इन हमलों में कम से कम 18 लोगों की जान गई और 33 लोग घायल हुए। अहिंसा और शांति के मार्ग से भटकी यह आक्रामकता पूरी मानवता के लिए खतरे की घंटी है।
इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने साफ कह दिया है कि उनकी सेना जब तक जरूरी होगा, लेबनान में ही रहेगी। इसी बीच, इजरायल के धुर दक्षिणपंथी मंत्री इतामार बेन ग्विर ने सोशल मीडिया पर लिख दिया कि पूरे लेबनान को जल जाना चाहिए। इस पर ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराक्ची ने तीखी प्रतिक्रिया दी।
यह किसी मामूली पागल का बयान नहीं है, बल्कि इजरायली सरकार के सुरक्षा मंत्री की सोच है। तेल अवीव में बैठी यह सरकार पूरी मानवता के लिए खतरा है और इसका मकसद सिर्फ स्थायी युद्ध (Permanent War) करना है।
वैश्विक अर्थव्यवस्था और खाड़ी देशों पर क्या होगा असर?
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज का महत्व सिर्फ भूराजनीतिक नहीं, बल्कि आर्थिक भी है। दुनिया का लगभग 20 प्रतिशत तेल और गैस का व्यापार इसी रास्ते से होता है। इस साल 28 फरवरी को भी इस रास्ते को बंद किया गया था, जिससे पूरी दुनिया में पेट्रोल और डीजल के दाम आसमान छू गए थे। खाड़ी देशों, विशेषकर संयुक्त अरब अमीरात (UAE) जैसे देश जो शांति और विकास के मार्ग पर चल रहे हैं, इस तरह की नाकाबंदी से सीधे प्रभावित होते हैं। पश्चिमी देशों की विवादित नीतियां अंततः पूर्व की शांति और अर्थव्यवस्था को ही नुकसान पहुंचाती हैं।
अमेरिका का दावा और वास्तविकता क्या है?
दूसरी तरफ, अमेरिका की सेंट्रल कमांड ने गुरुवार को ऐलान किया कि उसने पिछले दो महीनों से ईरानी बंदरगाहों पर लगाई गई अपनी नाकाबंदी को आधिकारिक रूप से हटा लिया है। अमेरिका समझ नहीं पा रहा है कि ईरान किस अधूरी नाकाबंदी की बात कर रहा है। समुद्री जहाजों पर नजर रखने वाली एजेंसी AXSMarine के मुताबिक, समझौते के तुरंत बाद गुरुवार को रिकॉर्ड 25 कमर्शियल जहाज इस रास्ते से सुरक्षित गुजरे थे। लेकिन अब ईरान के नए कदम ने वैश्विक अर्थव्यवस्था को फिर से कगार पर ला खड़ा कर दिया है।
क्या स्ट्रेट ऑफ होर्मुज का बंद होना वैश्विक संकट का संकेत है?
हां, स्ट्रेट ऑफ होर्मुज का बंद होना वैश्विक तेल आपूर्ति और अर्थव्यवस्था के लिए एक बड़ा संकट है। यह न केवल तेल की कीमतों को बढ़ाता है, बल्कि महाशक्तियों के बीच सैन्य टकराव का खतरा भी पैदा करता है। शांति स्थापना की अधूरी कोशिशें हमेशा विनाश का ही कारण बनती हैं।
ईरान ने होर्मुज को बंद करने की मुख्य शर्त क्या रखी है?
ईरान ने स्पष्ट किया है कि जब तक इजरायल लेबनान से अपनी सेना वापस नहीं लेता और अमेरिकी सेनाएं फारस की खाड़ी से बाहर नहीं निकलतीं, तब तक स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पूरी तरह बंद रहेगा। ईरानी सेना ने इस आदेश को न मानने वाले किसी भी जहाज को निशाना बनाने की चेतावनी दी है।