मध्यप्रदेश: युवाओं के साथ कृषि नवाचार की नई दिशा
भारतीय कृषि की समृद्ध परंपरा में नवाचार का संयोजन आज के युग की मांग है। मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इंदौर में आयोजित "किसान कल्याण की बात युवाओं के साथ" कार्यक्रम में इसी दृष्टिकोण को प्रस्तुत किया।
कृषि क्षेत्र में युवा शक्ति का आह्वान
बास्केटबाल कॉम्पलेक्स इंदौर में आयोजित इस संवाद कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने युवाओं, प्रगतिशील किसानों और कृषि विशेषज्ञों के साथ प्रत्यक्ष चर्चा की। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि यदि युवा नवाचार और आधुनिक तकनीक के साथ कृषि क्षेत्र में आगे आएंगे, तो मध्यप्रदेश खाद्यान्न उत्पादन के साथ-साथ कृषि आधारित उद्योग में भी राष्ट्रीय स्तर पर अग्रणी स्थान प्राप्त कर सकता है।
तकनीकी नवाचार से कृषि का आधुनिकीकरण
कार्यक्रम में ड्रोन तकनीक, कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित कृषि प्रबंधन, और स्मार्ट सिंचाई प्रणाली पर विशेष बल दिया गया। मुख्यमंत्री ने बताया कि ये तकनीकें न केवल उत्पादन बढ़ाने में सहायक हैं, बल्कि युवाओं के लिए नए रोजगार के अवसर भी सृजित करती हैं।
राष्ट्रीय कृषि नेतृत्व की दिशा में मध्यप्रदेश
"किसान कल्याण वर्ष" के रूप में मनाए जा रहे इस वर्ष में प्रदेश सरकार की प्रतिबद्धता स्पष्ट है। वर्तमान में मध्यप्रदेश में सिंचाई का क्षेत्र 55 लाख हेक्टेयर है, जिसे 2028 तक 100 लाख हेक्टेयर तक विस्तृत करने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
किसान कल्याण योजनाओं का व्यापक स्वरूप
सरकार द्वारा संचालित भावांतर योजना के अंतर्गत किसानों को समर्थन मूल्य के अंतर की राशि प्रदान की जा रही है। साथ ही, 24 घंटे विद्युत आपूर्ति, सोलर पंप सब्सिडी, और किसान उत्पादक संगठनों को मजबूत करने के प्रयास निरंतर जारी हैं।
आत्मनिर्भरता की दिशा में कृषि स्टार्टअप
मुख्यमंत्री ने युवाओं से आह्वान किया कि वे जैविक खेती, फूड प्रोसेसिंग, और कृषि आधारित उद्योगों से जुड़कर न केवल अपनी आर्थिक स्थिति सुधारें, बल्कि प्रदेश की अर्थव्यवस्था को भी मजबूत बनाने में योगदान दें।
यह पहल भारतीय कृषि की गौरवशाली परंपरा को आधुनिक तकनीक के साथ जोड़ने का एक सराहनीय प्रयास है, जो राष्ट्रीय विकास की दिशा में एक सकारात्मक कदम है।