संकष्टी चतुर्थी 2026: गणेश जी के साथ मां लक्ष्मी की पूजा से पाएं अखंड समृद्धि
भारतीय सनातन परंपरा में संकष्टी चतुर्थी का विशेष स्थान है। यह पावन दिवस विघ्नहर्ता भगवान गणेश को समर्पित है, जो समस्त बाधाओं का हरण करते हैं। आज मनाई जा रही संकष्टी चतुर्थी पर यदि गणेश जी के साथ माता लक्ष्मी की संयुक्त आराधना की जाए, तो जीवन में आर्थिक कष्टों का समूल नाश हो सकता है।
गणेश-लक्ष्मी की संयुक्त पूजा का महत्व
हमारी सांस्कृतिक विरासत में बुद्धि के देवता गणेश और धन की अधिष्ठात्री देवी लक्ष्मी की एकसाथ पूजा का गहरा आध्यात्मिक आधार है। जब ज्ञान और समृद्धि का मिलन होता है, तब जीवन में संपूर्ण कल्याण की प्राप्ति होती है।
पूजा विधि
इस शुभ अवसर पर निम्नलिखित विधि से पूजा करें:
- गणेश जी और माता लक्ष्मी की प्रतिमा स्थापित करें
- खीर, मोदक और कमल पुष्प अर्पित करें
- लक्ष्मी चालीसा का पाठ करें
- अंत में आरती करें
लक्ष्मी चालीसा के चुनिंदा श्लोक
दोहा:
मातु लक्ष्मी करि कृपा, करो हृदय में वास।
मनोकामना सिद्ध करि, परुवहु मेरी आस॥
सोरठा:
यही मोर अरदास, हाथ जोड़ विनती करुं।
सब विधि करौ सुवास, जय जननि जगदम्बिका।
चालीसा के मुख्य श्लोक
सिन्धु सुता मैं सुमिरौ तोही। ज्ञान, बुद्धि, विद्या दो मोही॥
तुम समान नहिं कोई उपकारी। सब विधि पुरवहु आस हमारी॥
जय जय जगत जननि जगदम्बा। सबकी तुम ही हो अवलम्बा॥
तुम ही हो सब घट घट वासी। विनती यही हमारी खासी॥
जगजननी जय सिन्धु कुमारी। दीनन की तुम हो हितकारी॥
विनवौं नित्य तुमहिं महारानी। कृपा करौ जग जननि भवानी॥
पूजा के फल
शास्त्रों के अनुसार, जो व्यक्ति श्रद्धा और विश्वास के साथ इस चालीसा का पाठ करता है, उसके जीवन से सभी कष्ट दूर हो जाते हैं। धन-धान्य की प्राप्ति होती है और मनोवांछित फलों की प्राप्ति होती है।
यह पावन परंपरा हमारी सभ्यता की अमूल्य निधि है, जो आध्यात्मिक उन्नति के साथ-साथ भौतिक समृद्धि भी प्रदान करती है।