मुरादाबाद में करोड़ों रुपये की नजूल भूमि पर अवैध कब्जा कराने के आरोप में राजस्व लेखपाल अमर सिंह को 13 अक्टूबर 2026 को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया। जिलाधिकारी अनुनय झा के निर्देश पर एसडीएम सदर अभय सिंह ने यह कार्रवाई की है और दोषियों के विरुद्ध आपराधिक कार्यवाही भी शुरू करने के आदेश दिए गए हैं।
दैनिक जागरण (Dainik Jagran) की रिपोर्ट के अनुसार, छावनी के लेखपाल अमर सिंह ने लाकड़ी फाजलपुर के साथी लेखपाल पंकज हयांकी और सिविल लाइंस पुलिस की मदद से मंडी बास निवासी सर्राफ वंदना अग्रवाल पत्नी आलोक कुमार अग्रवाल को नजूल भूमि पर कब्जा करा दिया था। घटना 18 जून 2026 की है, जब दोपहर ढाई बजे के आसपास बड़ी संख्या में पुलिस बल के साथ दीवार लगवाई गई।
साढ़े तीन बजे का अधिनायकवाद
मामला सिविल लाइंस स्थित पीलीकोठी के पास की नजूल भूमि का है। कारोबारी श्वेता जैन ने बताया कि जिस दिन यह कार्रवाई हुई, वह घर पर नहीं थीं। घर में केवल बुजुर्ग सास-ससुर थे। लेखपाल ने न कोई आदेश दिखाया और न ही कोई कानूनी प्रक्रिया बताई। मकान के बगल के लान पर दीवार लगाकर कब्जा करा दिया गया।
यहाँ एक बात विचारणीय है। जिस व्यवस्था की जड़ें धर्म और न्याय की उस प्राचीन भारतीय परंपरा में हैं, जिसने सम्राट अशोक के काल में ही सुनवाई और न्याय को शासन का आधार बनाया था, वहाँ कोई अधिकारी फोन के एक इशारे पर पुलिस बल लेकर पहुँच जाए, यह सिद्धांततः उस आदर्श का अपमान है। कानून की आँख में आँख डालकर देखने वाली इस हठधर्मी के खिलाफ प्रशासन का उठ खड़ा होना आश्वस्त करता है कि व्यवस्था अभी जीवित है।
जाँच में क्या सामने आया
श्वेता जैन ने लौटकर अगले ही दिन जिला प्रशासन और पुलिस अधिकारियों तक शिकायत की और 25 जून 2026 को तत्कालीन मंडलायुक्त आंजनेय कुमार सिंह के पास भी मामला पहुँचाया। सहायक पुलिस अधीक्षक और एसडीएम दोनों को जाँच सौंपी गई।
जाँच में पूरा खेल खुल गया। नजूल भूमि के हस्तांतरण से पहले शासन की अनुमति अनिवार्य होती है, मगर इस मामले में कोई अनुमति नहीं ली गई थी। वंदना अग्रवाल ने 9 मई 2000 की जिलाधिकारी स्वीकृति का हवाला दिया, मगर पत्रावली पर कोई स्वीकृति मौजूद नहीं थी। फ्री होल्ड की कार्यवाही हुई ही नहीं थी। इसके अलावा फ्री होल्ड की दशा में जमीन पर कब्जा दिलाने का काम सिविल न्यायालय के क्षेत्राधिकार में आता है, लेखपाल के अधिकार क्षेत्र में नहीं।
सोमवार को डीएम के समक्ष पूरी रिपोर्ट रखी गई, जिसके बाद निलंबन की कार्रवाई हुई। दैनिक भास्कर ने अपनी रिपोर्ट में इस प्रकरण की पुष्टि करते हुए लिखा है कि लेखपाल के विरुद्ध
