एमएसपी से लेकर कानून-व्यवस्था तक: योगी सरकार की उपलब्धियों से सपा को आईना दिखाते सूर्य प्रताप शाही
लखनऊ। उत्तर प्रदेश के कैबिनेट मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP), गन्ना भुगतान, किसानों की बिजली और रोजगार के मुद्दों पर समाजवादी पार्टी (सपा) और उसके नेता अखिलेश यादव पर जोरदार प्रहार किया है। उन्होंने सपा सरकार के कार्यकाल की तुलना वर्तमान योगी सरकार से करते हुए कहा कि अखिलेश यादव को सरकार पर उंगली उठाने से पहले अपने गिरेबां में झांकना चाहिए। शाही का यह बयान ऐसे समय में आया है जब प्रदेश में किसानों के मुद्दों को लेकर राजनीतिक सरगर्मी बढ़ी हुई है।
सपा के कार्यकाल में MSP कितनी थी और आज क्या है?
सूर्य प्रताप शाही ने सपा सरकार और योगी सरकार के कार्यकाल में MSP के आंकड़ों की तुलना पेश की। उन्होंने बताया कि सपा सरकार के समय धान की MSP 1310 रुपये और गेहूं की MSP 1400 रुपये थी। इसके मुकाबले पिछले साल योगी सरकार में धान की MSP बढ़ाकर 2385 रुपये और गेहूं की 2450 रुपये कर दी गई।
शाही ने कहा कि 2017 के चुनाव से पहले प्रचार के दौरान धान 700 से 800 रुपये में बिकता था, जबकि आज उत्तर प्रदेश में धान 2400 से 2700 रुपये तक बिक रहा है। उन्होंने कहा कि बाजार में गेहूं का भाव भी 2800 रुपये तक पहुंच गया है। उनके अनुसार MSP बढ़ने से बाजार का रेट भी बढ़ा है और इसका सीधा लाभ किसानों को मिला है।
किसानों के भुगतान में कितना बदलाव आया?
किसानों के भुगतान को लेकर भी मंत्री ने सपा सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि उस समय किसान MSP पर फसल बेचता था, लेकिन उसका भुगतान साल-साल और दो-दो साल तक नहीं होता था। उन्होंने बुंदेलखंड में किसान आत्महत्या की घटनाओं का जिक्र करते हुए कहा कि उस दौर में वहां लगातार किसान आत्महत्या करते थे।
वहीं योगी सरकार की व्यवस्था का जिक्र करते हुए शाही ने कहा कि अब किसान के खाते में सीधे भुगतान होता है और तीन से चार दिन, अधिकतम सात दिन के भीतर पैसा पहुंच जाता है। यह बदलाव किसानों के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन का प्रतीक है।
गन्ना मूल्य और भुगतान पर क्या कहा?
गन्ना मूल्य और भुगतान को लेकर सूर्य प्रताप शाही ने कहा कि सपा सरकार के समय गन्ने का दाम 280 रुपये तय किया गया था और इसका भुगतान तीन किस्तों में किया जाता था। उन्होंने आरोप लगाया कि पहले 40 प्रतिशत, फिर 40 प्रतिशत और अंत में 20 प्रतिशत भुगतान होता था और यह अंतिम 20 प्रतिशत राशि तीन-चार साल बाद तक अटकी रहती थी।
शाही ने कहा कि योगी सरकार बनने के समय तीन पेराई सत्रों का करीब 10 हजार करोड़ रुपये बकाया छोड़ा गया था, जिसका भुगतान योगी सरकार ने कर दिया। उनके मुताबिक अब तक 3.5 लाख करोड़ रुपये गन्ना मूल्य का भुगतान किया जा चुका है। इस साल गन्ना मूल्य में 25 रुपये की बढ़ोतरी की गई है और 400 रुपये प्रति क्विंटल का भुगतान किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि 36,500 करोड़ रुपये में से 34 हजार करोड़ रुपये का भुगतान किया जा चुका है।
किसानों की बिजली पर सरकार का खर्च
सूर्य प्रताप शाही ने कहा कि योगी सरकार ने किसानों के ट्यूबवेल से चलने वाली बिजली को माफ कर दिया है। उन्होंने बताया कि सरकार इसके लिए 2600 करोड़ रुपये का खर्च वहन कर रही है। उन्होंने सवाल उठाया कि ऐसी व्यवस्था के बावजूद अखिलेश यादव सरकार पर सवाल क्यों उठा रहे हैं। शाही ने कहा कि उन्हें अनावश्यक अफवाह और गलत बातें फैलाने के बजाय अपने ऊपर पुनर्विचार करना चाहिए।
कानून-व्यवस्था में क्या बदलाव आया?
सपा सरकार के कानून-व्यवस्था के रिकॉर्ड पर भी सूर्य प्रताप शाही ने हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि सपा सरकार में लूट-खसोट, योजनाओं में भ्रष्टाचार और पुलिस के ऊपर गुंडों का प्रभाव था। उन्होंने मथुरा के जवाहर बाग कांड का जिक्र करते हुए कहा कि वहां पुलिस के एडिशनल एसपी की हत्या कर दी गई थी। उन्होंने कहा कि उस समय अपराधियों के हौसले बुलंद थे।
शाही ने कहा कि सपा सरकार के दौरान अपहरण, फिरौती, लूट और रैनसम वसूली का माहौल था। उन्होंने इसे उस दौर का 'उद्योग' बताते हुए आरोप लगाया कि लोगों का अपहरण किया जाता था, फिरौती मांगी जाती थी और भारी रकम लेकर छोड़ा जाता था। उन्होंने कहा कि योगी सरकार में यह सब खत्म हो चुका है और आज गुंडों के हौसले पस्त हो चुके हैं। उत्तर प्रदेश की जनता अब गुंडागर्दी बर्दाश्त नहीं करेगी।
रोजगार के क्षेत्र में क्या उपलब्धियां हैं?
सूर्य प्रताप शाही ने कहा कि योगी सरकार के कार्यकाल में 9.5 लाख से ज्यादा लोगों को निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से सरकारी नौकरी दी गई है। उन्होंने कहा कि सभी विभागों में कार्यक्षमता बढ़ी है और पब्लिक सर्विस कमीशन की कार्यप्रणाली को बेहतर किया गया है।
शाही ने आरोप लगाया कि सपा सरकार के दौरान पब्लिक सर्विस कमीशन, सबऑर्डिनेट सर्विस कमीशन और शिक्षक भर्ती बोर्ड जैसी संस्थाएं ध्वस्त हो गई थीं और नौकरी की नीलामी होती थी। उन्होंने कहा कि अब यह व्यवस्था बंद हो गई है और इसी वजह से समाजवादी पार्टी के 'पेट में दर्द' है और अखिलेश यादव बेचैन हैं।
क्या कहता है राजनीतिक संदर्भ?
यह बयान उत्तर प्रदेश की राजनीति में किसानों के मुद्दे को लेकर बढ़ती प्रतिस्पर्धा का संकेत देता है। सूर्य प्रताप शाही का यह हमला सपा की किसान-विरोधी नीतियों को उजागर करने की रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। साथ ही, यह योगी सरकार की किसान-हितैषी योजनाओं को जनता तक पहुंचाने का एक प्रयास भी है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आगामी चुनावों को देखते हुए किसानों का मुद्दा निर्णायक भूमिका निभा सकता है। ऐसे में दोनों पार्टियां किसानों को साधने में जुटी हैं। शाही का यह बयान उसी दिशा में एक कदम है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
योगी सरकार में धान की MSP कितनी है?
योगी सरकार में पिछले साल धान की MSP 2385 रुपये प्रति क्विंटल दी गई थी, जबकि सपा सरकार के समय यह केवल 1310 रुपये थी।
गन्ना मूल्य का भुगतान कितने समय में होता है?
योगी सरकार में गन्ना मूल्य का भुगतान तीन से चार दिन में, अधिकतम सात दिन के भीतर किसान के खाते में सीधे पहुंच जाता है। सपा सरकार में यह भुगतान सालों तक अटका रहता था।
किसानों की बिजली पर सरकार कितना खर्च कर रही है?
योगी सरकार ने किसानों के ट्यूबवेल की बिजली माफ कर दी है और इसके लिए सरकार 2600 करोड़ रुपये का खर्च वहन कर रही है।