सऊदी की हवाई सुरक्षा में संकट: हूती हमलों के बीच पाकिस्तान समेत सहयोगियों से मदद की गुहार
यमन के हूती विद्रोहियों के लगातार ड्रोन और मिसाइल हमलों के बीच सऊदी अरब की हवाई सुरक्षा में गंभीर कमी आ गई है। दुनिया के सबसे बड़े तेल निर्यातक देश को अब अपने क्षेत्रीय और पश्चिमी सहयोगियों, जिनमें पाकिस्तान भी शामिल है, से एयर डिफेंस इंटरसेप्टर की मदद मांगनी पड़ी है। यह स्थिति न केवल सऊदी की सैन्य तैयारियों पर सवाल उठाती है, बल्कि पूरे खाड़ी क्षेत्र की सुरक्षा के लिए भी चिंता का विषय है।
हूती हमलों से सऊदी की एयर डिफेंस में क्यों आया संकट?
हूती विद्रोहियों के बढ़ते ड्रोन और मिसाइल हमलों ने सऊदी अरब के एयर डिफेंस इंटरसेप्टर के भंडार को लगभग समाप्त कर दिया है। एपी की रिपोर्ट के अनुसार, क्षेत्र से जुड़े दो अधिकारियों ने बताया कि सऊदी ने फ्रांस, ब्रिटेन, पाकिस्तान और मिस्र से तत्काल एयर डिफेंस सहायता देने का अनुरोध किया है। सऊदी की चिंता केवल सैन्य ठिकानों तक सीमित नहीं है, बल्कि उसे अपनी महत्वपूर्ण सरकारी इमारतों और तेल के बुनियादी ढांचे को भी सुरक्षित रखना है। हूती लगातार हमलों के जरिए सऊदी पर दबाव बना रहे हैं, जबकि लाल सागर में भी उनकी गतिविधियां बढ़ी हैं।
अमेरिका की क्षमता घटी, अब सहयोगियों की ओर देख रहा सऊदी
सऊदी के लिए सबसे बड़ी परेशानी उसका प्रमुख सैन्य सहयोगी अमेरिका भी है। एक क्षेत्रीय अधिकारी के मुताबिक, ईरान के साथ छह महीने से चल रहे युद्ध में अमेरिका के पास इंटरसेप्टर का भंडार काफी घट गया है। अब उसके पास अपनी सुरक्षा के लिए भी पर्याप्त मिसाइल नहीं बचे हैं, और यूक्रेन को देने के लिए भी अतिरिक्त भंडार नहीं है। यानी जिस अमेरिका से सऊदी दशकों से अपनी हवाई सुरक्षा जरूरतों को पूरा करता रहा है, उसकी क्षमता अब सीमित हो गई है। इसी स्थिति में सऊदी को फ्रांस, ब्रिटेन, पाकिस्तान और मिस्र की ओर देखना पड़ रहा है।
मक्का पर हमले की कोशिश और 'रेड लाइन'
सऊदी और हूतियों के बीच टकराव अब इस क्षेत्रीय संघर्ष का एक नया मोर्चा बन गया है। हूतियों ने हाल के दिनों में सऊदी के सैन्य और ऊर्जा ढांचे को निशाना बनाया है। बुधवार को सऊदी ने हूतियों पर इस्लाम के सबसे पवित्र शहर मक्का को ड्रोन से निशाना बनाने की कोशिश का आरोप लगाया। सऊदी ने कहा कि ड्रोन को हवा में ही रोक दिया गया, हालांकि हूतियों ने मक्का को निशाना बनाने से इनकार किया है। सऊदी ने मक्का को अपनी 'रेड लाइन' बताया है, जिसका अर्थ है कि इस पवित्र स्थल पर कोई भी हमला असहनीय होगा।
समुद्री मार्गों पर भी खतरा, तेल की आपूर्ति प्रभावित
मुश्किल सिर्फ आसमान से आने वाले हमलों की नहीं है। ईरान समर्थित इराकी मिलिशिया के हमले के बाद सऊदी की एक अहम पाइपलाइन कई हफ्तों से बंद बताई जा रही है। दूसरी तरफ हूती लाल सागर में सऊदी के जहाजों और बुनियादी ढांचे को निशाना बना रहे हैं। बाब अल-मंदेब जलडमरूमध्य के आसपास कई द्वीपों पर हूतियों की पकड़ मजबूत होने की खबरों ने भी सऊदी के लिए समुद्री रास्तों की चिंता बढ़ा दी है। उधर ईरान के साथ होर्मुज जलडमरूमध्य में जारी तनाव ने तेल की आवाजाही को और मुश्किल बना दिया है। तेल की कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर बनी हुई है, जो वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए भी चिंताजनक है।
पाकिस्तान से मदद की उम्मीद, तुर्की समझौते की परीक्षा
सऊदी ने जिन देशों से एयर डिफेंस मदद मांगी है, उनमें पाकिस्तान भी शामिल है। यह इसलिए अहम है क्योंकि सऊदी, तुर्की और पाकिस्तान के बीच नया रक्षा समझौता भी इस तनाव के बीच पहली बड़ी परीक्षा से गुजर रहा है। हालांकि पाकिस्तान और तुर्की के अधिकारियों ने एपी से कहा कि उन्हें हूतियों के ताजा हमलों के जवाब में सऊदी की ओर से सैन्य मदद का अनुरोध नहीं मिला है। ब्रिटेन ने सऊदी के साथ अपनी करीबी रक्षा साझेदारी की पुष्टि की, लेकिन यह बताने से इनकार किया कि क्या सऊदी ने सैन्य सहायता मांगी है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
सऊदी अरब को एयर डिफेंस इंटरसेप्टर की कमी क्यों हुई?
हूती विद्रोहियों के लगातार ड्रोन और मिसाइल हमलों ने सऊदी के इंटरसेप्टर भंडार को समाप्त कर दिया है, जबकि अमेरिका के पास भी ईरान के साथ युद्ध के कारण अतिरिक्त क्षमता नहीं बची है।
सऊदी ने किन देशों से मदद मांगी है?
सऊदी ने फ्रांस, ब्रिटेन, पाकिस्तान और मिस्र से एयर डिफेंस सहायता का अनुरोध किया है।
हूती हमलों का सऊदी की तेल आपूर्ति पर क्या असर पड़ा है?
हूती हमलों और ईरान के साथ तनाव के कारण सऊदी की एक अहम पाइपलाइन बंद है, जिससे तेल की आपूर्ति प्रभावित हुई है और कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर बनी हुई हैं।