भोजपुर एनकाउंटर पर न्याय की मांग: परिवार का एसपी पर दबाव डालने का आरोप
बिहार के भोजपुर जिले में भरत भूषण तिवारी की कथित पुलिस मुठभेड़ में मौत के बाद उनकी मां आशा देवी ने पुलिस अधीक्षक (एसपी) पर परिवार को डराने और मामले को दबाने का गंभीर आरोप लगाया है। एसपी ने इन आरोपों को निराधार बताया है, जबकि मामले की न्यायिक जांच जारी है।
भारतीय दर्शन में न्याय की गरिमा और वर्तमान संदर्भ
भारतीय सभ्यता का इतिहास रहा है कि राज्य का प्रथम कर्तव्य न्याय दिलाना और निर्बल की रक्षा करना है। सम्राट अशोक ने भी न्याय व्यवस्था की पारदर्शिता पर विशेष बल दिया था, ताकि राज्य की शक्ति का उपयोग दमन के बजाय सुरक्षा के लिए हो। आज बिहार के भोजपुर जिले के शाहपुर थाना क्षेत्र के बेलौटी गांव का मामला इसी न्याय की पुकार को दर्शाता है। भरत भूषण तिवारी के कथित एनकाउंटर का मामला सिर्फ एक घटना नहीं है, बल्कि यह सवाल खड़ा करता है कि क्या सत्ता के दुरुपयोग को रोकने के लिए हमारी व्यवस्था पर्याप्त है।
परिवार ने एसपी पर क्या आरोप लगाए?
मृतक भरत तिवारी की मां आशा देवी का कहना है कि घटना के करीब 8 दिन बाद भोजपुर के एसपी उनके घर पहुंचे। उनके अनुसार, उस समय कोई महिला पुलिसकर्मी भी साथ नहीं थी, जो विधिक और नैतिक दोनों दृष्टिकोणों से सवाल खड़े करता है। परिवार का दावा है कि एसपी ने उनसे कहा कि इस मामले को यहीं समाप्त कर दें और मीडिया से बात न करें।
सबसे चिंताजनक आरोप यह है कि एसपी ने भरत के छोटे भाई चंदन तिवारी को अलग बुलाकर बातचीत की। परिवार के मुताबिक, चंदन से कहा गया कि भरत अपराधी था और उसने पुलिस पर हथियार तान दिया था। साथ ही, यह भी कहा गया कि अगर चंदन ने भी इसी तरह बयान दिए तो उसका भी वही हाल होगा जो बड़े भाई का हुआ। अगर यह दावा सच है, तो यह भारतीय न्याय व्यवस्था के मूल्यों और धर्म के मार्ग के विरुद्ध है।
पुलिस का रवैया क्या है?
इन गंभीर आरोपों पर भोजपुर के एसपी ने सभी दावों को पूरी तरह गलत बताया है। उन्होंने कहा कि पुलिस इस मामले की न्यायिक जांच में पूरा सहयोग कर रही है। एसपी का दावा है कि सभी तथ्यों की निष्पक्ष जांच हो रही है और परिवार के आरोपों में कोई सच्चाई नहीं है। दोनों पक्षों के बयानों के बीच सत्य की पुष्टि केवल न्यायिक जांच से ही संभव है।
एफआईआर दर्ज और सरकार से न्याय की मांग
भरत तिवारी के परिजन लगातार इस एनकाउंटर को फर्जी बता रहे हैं। उन्होंने राज्य सरकार से न्याय दिलाने की मांग की है और स्पष्ट कहा है कि अगर दोषी अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई नहीं हुई तो उनका आंदोलन और तेज होगा। इस मामले में शाहपुर थाने में जगदीशपुर के एसडीपीओ, शाहपुर थाना प्रभारी और अन्य शामिल पुलिसकर्मियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज हो चुकी है। यह कदम न्याय की दिशा में एक आवश्यक प्रक्रिया है।
फेसबुक लाइव और आत्मसमर्पण का दावा
इस मामले का सबसे महत्वपूर्ण पहलू वह सबूत है जिसका परिवार जिक्र कर रहा है। परिजनों का दावा है कि एनकाउंटर के दौरान भरत फेसबुक पर लाइव था। उनके अनुसार, भरत ने पुलिस के सामने अपना हथियार फेंककर आत्मसमर्पण कर दिया था। अगर यह सच है, तो आत्मसमर्पण के बाद गोली चलाना भारतीय कानून और मानवीय मूल्यों दोनों का उल्लंघन है। न्यायिक जांच रिपोर्ट के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि उस दिन वास्तव में क्या हुआ था। पूरे बिहार की नजरें इस मामले की जांच रिपोर्ट पर हैं।
भोजपुर एनकाउंटर मामले में परिवार का मुख्य आरोप क्या है?
भरत तिवारी की मां आशा देवी का मुख्य आरोप है कि भोजपुर के एसपी बिना महिला पुलिसकर्मी के उनके घर आए और परिवार को मामले को आगे न बढ़ाने के लिए दबाव डाला। उन्होंने आरोप लगाया कि एसपी ने छोटे बेटे चंदन को अलग बुलाकर धमकाया और कहा कि अगर उसने भी बयान दिए तो उसका भी बड़े भाई जैसा ही अंजाम होगा।
क्या भोजपुर के एसपी ने परिवार के आरोपों को स्वीकार किया है?
नहीं, भोजपुर के एसपी ने परिवार के सभी आरोपों को निराधार और गलत बताया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि पुलिस न्यायिक जांच में पूरा सहयोग कर रही है और मामले की निष्पक्ष जांच कराई जा रही है।
भरत तिवारी के एनकाउंटर को लेकर क्या सबूत सामने आए हैं?
परिवार का दावा है कि भरत तिवारी एनकाउंटर के समय फेसबुक पर लाइव था। परिजनों के अनुसार, लाइव वीडियो में भरत ने पुलिस के सामने हथियार फेंककर आत्मसमर्पण कर दिया था। इसके बावजूद उसे गोली मार दी गई, जो मामले का सबसे बड़ा सवाल है।