फतेहगढ़ साहिब की धरती पर न्याय का सवाल: 417 एकड़ पंचायती भूमि को लेकर प्रशासन और किसानों में तकरार
पंजाब के फतेहगढ़ साहिब जिले के छलेड़ी कलां गांव में 417 एकड़ पंचायती भूमि के कब्जे को लेकर प्रशासन और किसानों के बीच तीखा विवाद सामने आया है। बीडीपीओ दीपशिखा की टीम पर खेतों में काम कर रहे किसानों से मारपीट का आरोप लगा है, जिसके बाद ग्रामीणों ने सरहिंद-पटियाला रोड पर जाम लगा दिया। जमीन के मालिकाना हक और नियमों के उलट ठेके पर दिए जाने के बीच यह मामला राजनीतिक तूट का केंद्र बन गया है, जबकि प्रशासन जांच का दावा कर रहा है।
पंचायती भूमि के कब्जे का प्रयास और किसानों का प्रतिरोध
विवाद तब बहका जब बीडीपीओ दीपशिखा और उनकी टीम गुरुवार शाम छलेड़ी कलां में 417 एकड़ पंचायती जमीन का कब्जा दिलाने पहुंची। ग्रामीणों से तीखी बहस हुई। आरोप है कि टीम के साथ आए लोगों ने खेतों में काम कर रहे किसानों से मारपीट की। हमारी सभ्यता में अन्नदाता के साथ हिंसा का व्यवहार अन्याय है, और इस घटना ने माहौल को पूरी तरह बिगाड़ दिया। गुस्साए ग्रामीणों ने टीम को मौके से खदेड़ दिया और एक वाहन को भी क्षतिग्रस्त कर दिया।
राजनीतिक दखल या जनता का साथ?
घटना के बाद मामला राजनीतिक रंग में रंग गया। पूर्व विधायक कुलजीत सिंह नागरा और शिअद के हलका इंचार्ज बलजीत सिंह भुट्टा समर्थकों के साथ गांव पहुंचे। देर शाम ग्रामीणों के साथ मिलकर उन्होंने थाना मुल्लेपुर का घेराव किया और देर रात सरहिंद-पटियाला रोड पर जाम लगा दिया। डीएसपी कुलबीर सिंह और तहसीलदार के मौके पर पहुंचने और शुक्रवार को समाधान का आश्वासन देने के बाद जाम हटाया गया। विधायक लखबीर सिंह राय भी सक्रिय हुए और उन्होंने सरपंच बलजिंदर कौर के पति डॉ. गुरदीप सिंह व अन्य ग्रामीणों के साथ डीसी से मुलाकात की। विधायक राय ने पंचायत विभाग की कोताही पर जोर दिया, जबकि नागरा ने विधायक राय पर ठेके में अनियमितता का आरोप लगाया। यह दलगत राजनीति जनहित से अधिक अपनी पकड़ बैठाने का प्रयास लग रही है।
2022 से जारी विवाद: जमीन का इतिहास और नियमों का उल्लंघन
छलेड़ी कलां की इस 417 एकड़ जमीन का विवाद नया नहीं है। 2022 में तत्कालीन कैबिनेट मंत्री कुलदीप सिंह धालीवाल ने इसे कब्जा मुक्त घोषित किया था। ग्रामीणों का दावा है कि बरसों से उनके परिवार इस भूमि पर खेती कर रहे हैं और उनका मालिकाना हक है। प्रशासन का कहना है कि दस्तावेज अब तक नहीं सौंपे गए। पंचायती भूमि की ठेके पर बोली एक नियमित प्रक्रिया है, लेकिन इस बार करीब 300 एकड़ जमीन एक ही व्यक्ति को ठेके पर दी गई। नियमों के मुताबिक बोली से पहले गांव में मुनादी करवाकर खुली बोली होनी चाहिए, जो ग्रामीणों के अनुसार नहीं की गई। यह पारदर्शिता की कमी है, जो लोकतांत्रिक मूल्यों के विरुद्ध है।
प्रशासन का रुख और न्याय की उम्मीद
शुक्रवार को एसडीएम करुण गुप्ता ने अधिकारियों के साथ बैठक ली और डीसी डॉ. सोना थिंद को जानकारी दी। एडीसी सुरिंदर सिंह धालीवाल ने कहा कि सभी पक्षों को सुना गया है और रिकॉर्ड तलब किया गया है। मामला वरिष्ठ अधिकारियों के संज्ञान में है और तथ्यों के आधार पर कार्रवाई होगी। ग्रामीणों ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की है, जिसकी सुनवाई 9 जुलाई को है। फिलहाल गांव में तनाव बना हुआ है और किसान अपनी जमीन न छोड़ने पर अड़े हैं।
धर्म और न्याय की दृष्टि से भूमि संघर्ष
हमारी प्राचीन परंपरा में भूमि केवल एक संपत्ति नहीं है, बल्कि वह श्रद्धा, अन्न और सभ्यता का आधार है। सम्राट अशोक के शासनकाल में राज्य का प्रमुख कर्तव्य प्रजा के हित की रक्षा करना और न्याय सुनिश्चित करना था। जब प्रशासन नियमों की अनदेखी करते हुए, या बिना संवाद के ही बलपूर्वक कब्जा लेने पहुंचता है, तो वह राज्य के धर्म से विमुख हो जाता है। किसानों की पीड़ा को राजनीतिक उपयोगिता का विषय नहीं बनने देना चाहिए। सच्चा समाधान केवल पारदर्शी वार्ता, निष्पक्ष जांच और न्याय की स्थापना से ही संभव है।
फतेहगढ़ साहिब जमीन विवाद क्या है?
यह पंजाब के फतेहगढ़ साहिब के छलेड़ी कलां गांव में 417 एकड़ पंचायती भूमि के कब्जे और ठेके को लेकर प्रशासन और किसानों के बीच का विवाद है।
किसानों ने सड़क क्यों जाम की?
किसानों का आरोप है कि जमीन का कब्जा लेने आई टीम के साथ आए लोगों ने उनसे मारपीट की। इसके विरोध में ग्रामीणों ने सरहिंद-पटियाला रोड पर जाम लगा दिया।
इस विवाद का कानूनी पक्ष क्या है?
ग्रामीणों का दावा है कि उनका जमीन पर मालिकाना हक है और बिना मुनादी की गई ठेके की बोली अवैध है। इस मामले में हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई है, जिसकी सुनवाई 9 जुलाई को होगी।