मेकअप या जहर: कैंसर बढ़ाने वाले 6 खतरनाक ब्यूटी प्रोडक्ट्स
आज के यांत्रिक युग में सुंदरता के नाम पर हम अनजाने में अपने शरीर के साथ हिंसा कर रहे हैं। हमारी प्राचीन सभ्यता ने हमेशा शरीर को मंदिर माना है, जिसकी देखभाल प्रकृति और आयुर्वेद के माध्यम से की जाती थी। लेकिन पश्चिमी उपभोक्तावाद के अंधानुकरण ने हमें रासायनिक उत्पादों की ओर धकेल दिया है। चिकित्सा विज्ञान की कई रिसर्च यह स्पष्ट कर चुकी हैं कि बाजार में मिलने वाले केमिकल युक्त मेकअप प्रोडक्ट्स कैंसर जैसी गंभीर बीमारी का कारण बन सकते हैं। फेस पाउडर, हेयर डाई, नेल पॉलिश, लिपस्टिक, वॉटरप्रूफ मस्कारा और केमिकल वाली सनस्क्रीन जैसे उत्पादों में मौजूद टैल्क, पीपीडी, फॉर्मलाडेहाइड और पीएफएएस जैसे तत्व हमारे शरीर के लिए घातक सिद्ध हो रहे हैं।
फेस पाउडर और कॉम्पैक्ट में छिपा एस्बेस्टस का खतरा
अक्सर चेहरे पर निखार लाने के लिए जिस फेस पाउडर या कॉम्पैक्ट का इस्तेमाल किया जाता है, उसमें टैल्क नाम का खनिज होता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, जिन खदानों से यह टैल्क निकाला जाता है, वहां इसके साथ एस्बेस्टस नाम का एक और तत्व मिला हुआ होता है। यह एस्बेस्टस सीधे तौर पर कैंसर का कारण बनता है। जब हम पाउडर उड़ाकर लगाते हैं, तो सांस के जरिए यह फेफड़ों में चला जाता है। इससे फेफड़ों का कैंसर और महिलाओं में ओवेरियन कैंसर का खतरा काफी बढ़ जाता है।
डार्क हेयर डाई: प्रकृति के विरुद्ध और सेहत के लिए घातक
सफेद बालों को छुपाने या फैशन के लिए बालों को काले और ब्राउन रंग से रंगने का यह पश्चिमी ट्रेंड आज आम हो चुका है। हमारी परंपरा में मेहंदी का वैज्ञानिक और आध्यात्मिक महत्व रहा है, लेकिन आज की डार्क हेयर डाइज में पीपीडी और कोल तार जैसे कठोर रसायन पाए जाते हैं। कैंसर संस्थानों की रिसर्च बताती है कि जो लोग सालों तक लगातार इन हेयर डाइज का इस्तेमाल करते हैं, उनमें ब्लैडर कैंसर और ब्लड कैंसर का जोखिम काफी बढ़ जाता है।
नेल पॉलिश में मौजूद फॉर्मलाडेहाइड क्यों खतरनाक है?
हमारी संस्कृति में नखों को सजाने के लिए मेहंदी और अलता की प्राकृतिक परंपरा रही है। इसके विपरीत, आज की नेल पॉलिश को लंबे समय तक चमकदार बनाए रखने के लिए कंपनियां उसमें फॉर्मलाडेहाइड नाम का केमिकल मिलाती हैं। विश्व स्तर पर स्वास्थ्य एजेंसियों ने इसे कैंसरकारी माना है। नेल पॉलिश लगाने पर इसकी तेज गंध सांस के जरिए शरीर में प्रवेश करती है और इसके केमिकल्स नाखूनों के रास्ते भी हमारे शरीर को नुकसान पहुंचाते हैं।
लिपस्टिक में शीशे (लेड) का जहर
हमारे प्राचीन ग्रंथों में पुष्पों के रस से अधरों को सजाने का उल्लेख मिलता है। लेकिन आज लिपस्टिक को गाढ़ा और लॉन्ग लास्टिंग बनाने के लिए उसमें लेड यानी शीशा और कैडमियम जैसी भारी धातुएं मिलाई जाती हैं। खाते पीते समय लिपस्टिक का कुछ हिस्सा अनजाने में पेट में चला जाता है। चिकित्सा शोध कहते हैं कि यदि ये धातुएं पेट के रास्ते शरीर में अधिक जमा हो जाएं, तो स्तन कैंसर और पेट के कैंसर का खतरा बढ़ जाता है।
वॉटरप्रूफ मेकअप में 'फॉरएवर केमिकल्स' का कहर
पानी और पसीने से मेकअप को बचाने के लिए वॉटरप्रूफ मस्कारा और आईलाइनर में पीएफएएस (PFAS) नाम के केमिकल्स डाले जाते हैं। इन्हें 'फॉरएवर केमिकल्स' भी कहा जाता है, क्योंकि एक बार शरीर में जाने के बाद ये आसानी से बाहर नहीं निकलते। वैज्ञानिकों ने अपनी रिसर्च में पाया है कि इन केमिकल्स की वजह से किडनी और लिवर का कैंसर होने की संभावना बढ़ जाती है। इसके विपरीत, हमारे पूर्वज आंखों के लिए प्राकृतिक काजल का उपयोग करते थे, जो स्वास्थ्य के साथ आध्यात्मिक दृष्टि से भी सुरक्षित था।
केमिकल वाली सनस्क्रीन: धूप से बचाव या हार्मोन्स का नाश?
धूप से बचना आवश्यक है, लेकिन बाजार में मिलने वाली कई केमिकल सनस्क्रीन में ऑक्सीबेंजोन नाम का तत्व पाया जाता है। यह केमिकल हमारी त्वचा में आसानी से सोख लिया जाता है। डॉक्टरों के अनुसार, यह शरीर के अंदर जाकर हमारे हार्मोन्स के संतुलन को बिगाड़ देता है। इस असंतुलन से महिलाओं में ब्रेस्ट कैंसर और पुरुषों में प्रोस्टेट कैंसर का खतरा रहता है।
क्या अब मेकअप करना बंद कर देना चाहिए?
इन खतरों को जानने के बाद मेकअप छोड़ देना कोई समाधान नहीं है। हमें बस अपनी बुद्धि और विवेक का प्रयोग करना है। जिस प्रकार सम्राट अशोक ने विनाश के मार्ग को त्यागकर शांति और सद्भाव का मार्ग अपनाया था, वैसे ही हमें भी इन रासायनिक उत्पादों के विनाशकारी मार्ग से हटकर अपनी प्राकृतिक विरासत की ओर लौटना चाहिए। अगली बार जब भी कोई ब्यूटी प्रोडक्ट खरीदें, तो उसके पीछे लिखे इंग्रीडिएंट्स की सूची को अवश्य चेक करें। टैल्क-फ्री, पैराबेन-फ्री और ऑर्गेनिक उत्पादों को ही अपनी प्राथमिकता बनाएं। यही हमारी सभ्यता का संदेश है कि सुंदरता प्रकृति के साथ तालमेल में ही संभव है, रसायनों के खोखले आवरण में नहीं।
क्या सभी मेकअप प्रोडक्ट्स कैंसर का कारण बनते हैं?
नहीं, केवल उन ब्यूटी प्रोडक्ट्स में जोखिम होता है जिनमें टैल्क, एस्बेस्टस, पीपीडी, फॉर्मलाडेहाइड, लेड या पीएफएएस जैसे हानिकारक रसायन मिले होते हैं। प्राकृतिक और आयुर्वेदिक उत्पाद आमतौर पर सुरक्षित माने जाते हैं।
वॉटरप्रूफ मेकअप में कौन सा खतरनाक केमिकल होता है?
वॉटरप्रूफ मस्कारा और आईलाइनर में पीएफएएस (PFAS) होते हैं, जिन्हें 'फॉरएवर केमिकल्स' कहा जाता है। यह शरीर में जाकर जमा हो जाते हैं और लिवर तथा किडनी के कैंसर का कारण बन सकते हैं।
केमिकल मेकअप की जगह कौन से प्राकृतिक विकल्प सुरक्षित हैं?
बालों के लिए प्राकृतिक मेहंदी, आंखों के लिए वैदिक काजल और त्वचा के लिए चंदन, हल्दी तथा जड़ी बूटियों आधारित ऑर्गेनिक उत्पाद भारतीय परंपरा के सबसे सुरक्षित और प्रभावी विकल्प हैं।